HOLI – भारतीय संस्कृति की पहचान

HOLI – भारतीय संस्कृति की पहचान – होली का नाम लेते ही हमारा मन उत्साह, उमंग, उल्लास, हर्ष, से भर जाता मन में एक ख़ुशी की लहर होती है और दिल में सभी के लिए प्रेम भावनाए होती है क्युकी इस दिन सभी लोगो के मन में किसी के प्रति शत्रुता का भाव नहीं रहता है.

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यह वसंत ॠतु में मनाया जाने वाला प्रमुख त्यौहार है यह त्यौहार दो दिन तक चलता है फाल्गुन माह की पूर्णिमा को होलिका दहन होता है और चैत्र माह की एकक को धुलंडी मनाई जाती है पहले दिन सभी रात्रि के समय गाँव की किसी एक जगह पर एकत्रित होकर होलिका दहन किया जाता है उस दहन की लौ में हरे पक्के अनाज को भुना जाता है ऐसी मान्यता है इस अनाज के सेवन से आप बहुत से रोगों से बच सकते हो और दुसरे दिन धुलंडी का आयोजन होता है इस दिन सभी एक दुसरे को रंग लगते है. इस दिन मिठाइयाँ नमकीन और ठंडाई का इंतजाम किया जाता है. 

यह त्यौहार हर किसी के जीवन में उर्जा का नया संचार पैदा करता है और सभी को मिलजुल कर रहने की शिक्षा देकर जाता है.

इस दिन बच्चे बूढ़े जवान सभी एक दुसरे का सम्मान और प्यार प्रेम की बाते करते है होली का त्यौहार रंगों से रंगने का त्यौहार नहीं है बल्कि एक दुसरे के जीवन में प्यार के रंग भरने का त्यौहार होता है. इस दिन चारों और आपसी भाईचारे और शांति का मौहाल होता है.

HOLI - भारतीय संस्कृति की पहचान

होली के इस पावन पर्व पर रात्रि में पुरुषों के द्वारा राग धमाल का प्रोग्राम किया जाता है उसमे बजने वाले चंग मंजीरो से हर व्यक्ति का मन मोहित होता है गाँव के बच्चे और नव युवक रात्रि के समय खेल खेलते है जिसे राजस्थान में टिल्यो कहा जाता है इस खेल में किसी एक बच्चे द्वारा बाकि बचे सभी बच्चो में से किसी एक पकड़ना होता है इस प्रकार पूरी रात्रि को मौज मस्ती चलती रहती है दिन के समय घर की स्त्रियाँ गोबर के उबले बनाती है इनका प्रयोग जब होली का दहन होता है तब किया जाता है. लोग इस त्यौहार पर घरो को सजाते है और सभी लोग नई नई खरीददारी करते है इस प्रकार फाल्गुन के इस महीने चारों तरफ खुशिया ही खुशियां होती है.तो चलिए जानते है की होली(holi) के पावन पर्व की शुरुआत किस प्रकार हुई थी – 

HOLI(होली) के बारे में पौराणिक कथाये-

होली का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतिक के रूप में मनाया जाता है, माना जाता है की प्राचीन समय में हिरण्यकश्यप नामक एक राजा था और उसका एक भाई था जिसको भगवान विष्णु ने उसके गलत कार्यो के कारण मार दिया लेकिन हिरण्यकश्यप ने भगवान विष्णु से बदला लेने के लिए ब्रह्मा की उपासना की. ब्रह्मा जी हिरण्यकश्यप की तपस्या से प्रसन्न हो गए और उससे वरदान मांगने के लिए कहा सबसे पहले तो हिरण्यकश्यप ने सबसे पहले  अजर अमर होने का वरदान माँगा लेकिन ब्रह्मा जी ने इसे देनें के लिए मना कर दिया और दुसरे वरदान के लिए कहा जब हिरण्यकश्यप ने माँगा की मेरी मौत ना तो किसी इंसान से, जानवर से, जल से, ना आकाश में और ना ही पाताल में इनमे से किसी भी प्रकार से मेरी मृत्यु ना हो ब्रह्मा जी ने यह वरदान हिरण्यकश्यप को दे दिया इसके बाद हिरण्यकश्यप ने पुरे राज्य में यह घोषणा कर  की आज के बाद यदि कोई विष्णु की पूजा करेगा वो मेरा परम शत्रू होगा और उसे मृत्यु दण्ड दिया जायेगा इस घोषणा के बाद कोई भी विष्णु की पूजा नहीं करता था और हिरण्यकश्यप अपने आपको   भगवान मनाने लग गया लेकिन कुछ समय पश्चात् उसके एक पुत्र हुआ जिसका नाम प्रह्लाद था प्रह्लाद बचपन से ही भगवान विष्णु का परम पुजारी था और रोज भगवान विष्णु की आराधना करता था. हिरण्यकश्यप के बार बार समझाने पर भी प्रह्लाद सिर्फ विष्णु की ही पूजा करता था अंत में हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के बारे में सोचा. प्रह्लाद को मरने के लिए हिरण्यकश्यप ने उसके कभी खाने में जहर दिया तो कभी पहाड़ से फेक दिया कभी समंदर में फेका और हाथी के पैरो नीचे के कुचले की कोशिश की लेकिन हर बार वह भगवान विष्णु के प्रभाव से बच जाता था. हिरण्यकश्यप की एक बहन थी जिसका नाम होलिका था होलिका को यह वरदान मिला हुआ था की अग्नि का प्रभाव का प्रभाव उसके शरीर पर बिलकुल भी नहीं पड़ेगा  अंत में हिरण्यकश्यप ने सोचा की प्रह्लाद को होलिका   के साथ अग्नि कुण्ड में बैठाया जाये जिससे होलिका तो बच जाएगी और प्रह्लाद की मृत्यु हो जायेगी.

इस प्रकार प्रह्लाद को होलिका की गोद में जलाते हुए अग्नि कुण्ड में बैठा दिया लेकिन हुआ बिलकुल हिरण्यकश्यप की सोच के विपरीत उस कुण्ड में होलिका का तो जलकर राख हो गई लेकिन प्रह्लाद को विष्णु के प्रभाव से कुछ भी नहीं हुआ और अंत में भगवान विष्णु द्वारा हिरण्यकश्यप का वध कर दिया गया और इस प्रकार लोगो द्वारा होली को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाने लगा.

भगवान कृष्ण का होली (HOLI) से संबंद्ध – 

उत्तर भारत के कुछ लोगो का मानना है की द्वापरयुग में एक कंस नाम का राजा हुआ था जिसके अत्याचारों के कारण जनता बहुत परेशान थी. इसलिए भगवान विष्णु ने श्री कृष्ण के रूप में अवतार लेकर उसका अंत करने का निश्चिय किया इस बात का पता जब कंस को लगा तो उसने भगवान कृष्ण को मारने के लिए एक पूतना नामक राक्षसी को भेजा जिसके दूध का स्तनपान करने पर कोई भी जिन्दा नहीं बच सकता था. जब पूतना ने कृष्ण को स्तनपान करवाया तो श्री कृष्ण के स्तनपान करने पर पूतना का रंग ही नीला पड़ गया और अंत में मौत हो गई.

श्री कृष्ण के इस चमत्कार के कारण लोगों ने आपस में मिलकर खुशियां मनाई और दुसरे दिन एक दुसरे को रंग लगाकर बधाई दी.

HOLI - भारतीय संस्कृति की पहचान

कुछेक का मानना है की भगवान कृष्ण का रंग थोडा सांवला था इस कारण वह अपनी मैया यशोदा से शिकायत करते रहते थे की में सांवले रंग का क्यों हु और मेरी सखी सहेलियाँ गोरे रंग की क्यों है एक दिन मैया यशोदा ने कहा की जाओ तुम भी सब को अपनी पिचकारी से रंग बिरंगे रंगों से रंग दो. अपनी मैया की बात सुनकर श्री कृष्ण ने अपने संग खेल रही गोपियों को अपनी पिचकारी से रंग दिया इस बात पर गोपियाँ थोड़ी नाराज हुई लेकिन बाद में नटखट कान्हा के मनमोहक स्वाभाव के कारण वो भी उसके साथ खेलने लग गई और इस प्रकार धुलंडी खेलने की परम्परा हर साल बढती गई और इस प्रकार यह त्यौहार उत्तर भारत के साथ साथ भारत के शेष सभी हिस्सों में फैल गया और हर साल बड़े धूमधाम से मनाया जाने लगा.

होलिका दहन के दुसरे दिन धुलंडी होती है और यह दिन सबके लिए खास होता है क्युकी इस दिन सभी एक दुसरे को रंग लगाकर बधाईयाँ देते है इस दिन सभी लोग आपस में इस तरह से मिलकर रहते है जैसे सभी एक ही परिवार के सदस्य हो इस दिन कोई भी किसी को रंग लगाने पर बुरा नहीं मानते है साथ में यदि कोई बुरा मनाता है तो “उसे बुरा ना मानो होली है” कहकर शांत कर दिया जाता है.

भारत के प्रसिद्ध स्थानों की होली (HOLI) जिसे देखने के लिए लोग दुनिया भर से आते है- 

वैसे तो होली भारत के प्रत्येक स्थान पर बड़े धूमधाम से मनाई जाती है लेकिन इसके अलावा भारत के कुछ स्थान ऐसे भी है जहा की होली पूरी दुनिया में मशूहर है और उसे देखने के लिए लोग विदेशों से भी यहाँ पर आते है- 

1. बरसाना की होली (HOLI)  – 

यह स्थान भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में है. उत्तर प्रदेश भारत के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है इसे राम, कृष्ण की जन्म भूमि भी कहा जाता है. भगवान श्री कृष्ण का जन्म भी यही हुआ था और अपनी अधिकतर रासलीला यही पर रचाई थी.

यह होली राधा कृष्ण के प्रेम प्रसंग के याद में खेली जाती है क्युकी राधा बरसाने की थी और कृष्ण नंदगाँव के थे.

इस दिन नंदगाँव के पुरुषों की टोली हाथो में पिचकारी लेकर बरसाने गाँव में जाती है और बरसाने की महिलाएं नंदगाँव के पुरुषों पर लाठियों से प्रहार करती है. नंदगाँव के पुरुषों को बरसाने की महिलाओ के लाठियों के प्रहार से बचना होता है और साथ ही उनको रंग में बिगोना भी होता है ऐसी मान्यता है की लाठियों के प्रहार से किसी को भी गंभीर चोट नहीं आती है.

2 वृन्दावन की होली (HOLI) – 

यह होली भी उत्तर प्रदेश राज्य में मनाई जाती है इस होली की खास बात यह है की इसमें किसी प्रकार के रंगों का प्रयोग नहीं किया जाता है. इस होली में केवल एक दुसरे पर रंग बरसाकर मनाया जाता है.

3 बीरबल बादशाह की होली (HOLI) – 

यह होली राजस्थान के अजमेर जिले में मनाई जाती है इस होली की शुरुआत मुग़ल काल के बादशाह अकबर के शासन काल में हुई थी यह पर्व ढाई दिन तक चलता है इसमें शाही सवारी पुरे शहर में निकाली जाती है जिसमे शहर के सभी लोग हिस्सा लेते है.

होली(HOLI) के पावन पर्व पर क्या क्या सावधानियों बरती जानी चाहिए – 

होली एक पवित्र त्यौहार है जिसमे सभी समुदाय के लोग मिल जुल कर हिस्सा लेते है और सभी एक दुसरे को मुबारक देते है साथ में मिलकर रंगों से खेलते है

लेकिन कभी कभी थोड़ी से असावधानी के कारण किसी को जिंदगी भर परेशानी उठानी पद सकती है इसलिए हमें अपने साथ साथ दुसरे को भी यह जानकारी देनी चाहिए हमें किस प्रकार होली खेलने चाहिए- 

1 जिस दिन होलिका दहन होता है उस दिन होलिका दहन के समय धक्का मुक्की ना करे अन्यथा होली की ज्वाला से किसी का नुकसान हो सकता है.

2 दुसरे दिन धुलंडी होती है और हम सभी मिलकर इस त्याहौर बड़े आनंद से मानते है लेकिन रंगों का प्रयोग करते समय हमें ध्यान रखना है की केवल गुलाल का प्रयोग करना चाहिए, केमिकल युक्त रंगों का प्रयोग बिलकुल भी नहीं करे.

3 पिचकारी से खेलते समय किसी की आँख में पिचकारी नहीं मारे अन्यथा उसको आँख में चोट लग सकती है.

4 अपने रंगों में गोबर कीचड़ और गंदे पानी का इस्तेमाल नहीं करे क्युकी इससे किसी को इन्फेक्शन हो सकता है.

5 यदि आप चश्मे का प्रयोग करते है तो आप चश्मे का उतारकर होली खेलिए क्युकी खेलते वक्त आपका चश्मा टूट सकता है और इससे आपको चोट लग सकती है 

6 आप जब भी होली खेलने जाए सबसे पहले आप अपने शरीर पर कोई तैलीय वस्तु को लगाके जाए इससे आपके शरीर पर रंगों का प्रभाव कम होगा

7 होली खेलते समय कभी कभी हम एक दुसरे से लड़ने झगड़ने लग जाते है ऐसा आप बिलकुल भी ना करे यदि ऐसी कोई बात होती है तो आप एक दुसरे को समझाये की यह रंगों का त्यौहार है और इस पर झगड़ते नहीं है.

8 यदि आपके घर में कोई पालतू जानवर है आप उसको रंग लगा रहे है तो ध्यान रखे की उसके पुरे शरीर पर रंग ना डाले क्युकी उससे उसकी त्वचा पर विपरीत प्रभाव पड सकता है.

भारत के अलावा अन्य देशों में होली(HOLI) का त्यौहार – 

ऐसा नहीं है की होली सिर्फ भारत में खेली जाती है भारत के अलावा अन्य देशों में भी होली बड़े धूमधाम से मनाई जाती है. नेपाल मॉरिशस बांग्लादेश पाकिस्तान अफगानिस्तान बर्मा इंग्लैंड अमरीका और जहा भी भारतीये समुदाय के लोग राहते है वहा पर होली मनाई जाती है 

निष्कर्ष – 

भारतीय समुदाय में होली का विशेष महत्त्व है यह हमें भाईचारे और शांति का सन्देश देती है और लोगो को यह सिख देती है की आप लोगों के जीवन खुशियों के रंग भरिये आपके जीवन में अपने आप रंग भर जायेंगे और हमें प्रेरणा देती है यदि हम सभी मिलजुलकर रहेंगे तो हमारे जीवन प्यार प्रेम और भाईचारा हमेशा बना रहेगा.

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jagdish meena

नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम जगदीश मीना है और thehindistar का फाउंडर हु.में अपने ब्लॉग के माध्यम से आप लोगो तक रोचक एवं महत्वपूर्ण जानकारीया शेयर करता हु.

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